रविवार, 15 मई 2022

मोहब्बत की निशानी पर दावों की कहानी

उलझा ताज का राज

मोहब्बत की निषानी पर प्रेमी- प्रेमिकाओं से ज्यादा राजनीतिज्ञों, हिन्दू- मुस्लिमों तथा पूर्व राजघरानों का उमड़ रहा प्यार

 जयपुर। मोहब्बत की निशानी आगरा का ताजमहल बरसों से यूं तो सात समंदर पार से भी प्रेमी जोड़ों को अपनी ओर खींचता रहा है लेकिन अब इसने देश के राजनीतिज्ञों को भी अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया है। वे ताज की आड़ में अपनी राजनीति चमकाने को ताज का राग अलापने में लगे हैं। यही नहीं, इस पर हिन्दू- मुस्लिम धर्मावलंबियों की मोहब्बत तो इतनी उमड़ने लगी है कि वे इसे अपने-अपने धर्मों से जोड़ने की जुगत में जुट गए हैं। इसबीच, पूर्व राजघरानों की प्यार-मोहब्बत कहां छुपती। इसलिए उन्होंने भी इस पर मालिकाना हक जताकर इससे अपनी मोहब्बत का इजहार कर दिया है।

हालात ये हो गए हैं कि दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताज की खुद की हकीकत भी अब अजूबा बनने लगी है। विभिन्न पक्षों के दावों- प्रतिदावों के बीच ताज का राज खुलने के बजाय दिन-ब-दिन उलझता ही जा रहा है। ताज के राज में ताजा एंट्र्ी राजस्थान के तत्कालीन जयपुर राजघराने और मुगलिया सल्तनत के वारिसों की हुई है।

जयपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली दीया कुमारी ने ताज पर अपना मालिकाना दावा ठोककर न केवल दुनिया को चैंका दिया बल्कि ताजमहल के रहस्य को और अधिक राजदार बना दिया। दीया फिलहाल राजसमंद से भाजपा की सांसद भी हैं इसलिए ताज के मंदिर, मस्जिद अथवा मकबरा होने के विवाद में भगवा राजनीति की चिंगारी को एक नई हवा भी मिली है। हालांकि दीया ने ताजमहल पर अपने परिवार की सम्पत्ति के दावे के पक्ष में कोई दस्तावेज तो पेश नहीं किए लेकिन उन्होंने इस राज से जुड़े कागजात अदालत के कहने पर उसमें पेष करने की बात जरूर कही है। उन्होंने इसके दस्तावेज अपने पोथीखाने में मौजूद होनेे की बात भी कही। दीया कुमारी ने दावा किया है कि उनके पास ऐसे डॉक्यूमेंट मौजूद हैं, जो बताते हैं कि पहले ताजमहल जयपुर राजपरिवार का पैलेस हुआ करता था, जिस पर शाहजहां ने कब्जा कर लिया था। जब शाहजहां ने जयपुर परिवार का वह पैलेस और जमीन ली तो राजपरिवार उसका विरोध नहीं कर सका, क्योंकि तब उसका शासन था।

दीया कुमारी ने ताजमहल पर अपना हक तो जताया है लेकिन वे नहीं चाहती कि ताजमहल को तोडा जाना चाहिए। उनका कहना है कि ताजमहल के बंद पडे़ कमरों को खोला जाना चाहिए। इसके कुछ हिस्से लंबे वक्त से सील हैं, जिनकी जाँच होनी चाहिए। जिससे यह पता चले कि वहां क्या था, क्या नहीं था।

इससे पहले ऐसा ही बयान 2017 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दिया था। उन्होंने दावा किया था कि जयपुर के महाराजा को शाहजहाँ ने मजबूर किया था।

ताजमहल पर जयपुर राजघराने के मालिकाना हक के दावे के बाद तत्कालीन मुगलिया सल्तनत के वारिस कहां चुप रहने वाले थे? हैदराबाद के रहने वाले और खुद को शाहजहां का वंषज बताने वाले प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने दीया कुमारी के दावे को महज चीप पब्लिसिटी स्टंट बताया। उन्होंने दीया कुमारी को ताजमहल के मालिकाना हक के दस्तावेज दिखाने का खुला चैलेंज दिया

पिं्रस तूसी ने कहा है कि दीया कोई दस्तावेज दिखा दें तो मैं मान लूंगा। यह केवल हवा में मारा गया तीर है। मुगल सल्तनत, फिर ब्रिटिश हुकूमत और फिर आजाद भारत हुआ। इतने समय में आपको याद नहीं आया कि ताजमहल आपका है। मुगल साम्राज्य में 14 में से 9 रानियां राजपूत थीं तो हमारा ननिहाल भी है और आप हमारे रिश्तेदार हुए। उन्होंने राजकुमारी दीया के दावे पर कहा कि अगर आप में एक कतरा भी राजपूताना खून है तो कागजात दिखाइए। उन्होंने कहा कि अभी एक भाजपा नेता ने कोर्ट में एप्लिकेशन डाली है। कल को वो कहेंगे गुरुद्वारे, चर्च की जांच करवाओ, तो क्या होगा। मेरी देश की जनता से अपील है कि ऐसे लोग चीप पब्लिसिटी के लिए हिंदू और मुसलमान भाइयों में कंट्रोवर्सी करना चाहते हैं। ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान न दिया जाए। वहीं, राजकुमारी दीया को अपने मौसा-मौसी की इज्जत का ख्याल रखना चाहिए।

गौरतलब है कि पिं्रस तूसी खुद को मुगल बादशाह शाहजहां का वंशज मानते हैं। उनके अनुसार वो आखिरी यानी छठवीं पीढ़ी में मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के पोते हैं। उन्होंने कई वर्षों पहले अयोध्या की बाबरी मस्जिद और ताजमहल पर मालिकाना हक का दावा किया था, लेकिन न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया था। पहले उन्हें आगरा आगमन पर प्रोटोकॉल मिलता था, लेकिन अब उर्स इंतजामिया कमेटी और पुरातत्व विभाग दोनों ही उनकी उपेक्षा करते हैं। हालांकि पिं्रस को ताजमहल आने पर सुरक्षा अभी भी मिलती है। पिं्रस तूसी ने माना कि हालांकि अब राजघराने जैसी व्यवस्थाएं खत्म हो गई हैं इसलिए उन्हें मुगलिया संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं मिल सकता।

प्रेम के प्रतीक के रूप में मशहूर ताजमहल का विवादों से नाता सत्तर के दशक में उस वक्त जुड़ा जब इतिहासकार पीएन ओक ने अपनी किताब में दावा किया कि ताजमहल एक मंदिर है। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग समेत कई विशेषज्ञ इस तथ्य की जांच में जुट गए। इसके बाद मोहब्बत की यह इमारत हिन्दू-मुस्लिमों में बंटवारे की एक नई इबारत बन गई। इसी विवाद की जद में 2015 में आगरा के सिविल कोर्ट में ताज को तेजामहालय मंदिर घोषित करने को लेकर याचिका दायर की गई। साल 2017 में भाजपा सांसद विनय कटियार ने यूपी सरकार से ताजमहल का नाम तेजोमहल करने की मांग की।

वहीं, अयोध्या के एक भाजपा नेता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका लगाकर ताजमहल के उन 22 कमरों को खुलवाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सर्वे कराने की मांग की जो लंबे वक्त से बंद हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ताजमहल में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां और शिलालेख हो सकते हैं। यह साफ होना चाहिए कि वह शिव मंदिर है या मकबरा। अगर बंद दरवाजे खुलेंगे तो यह विवाद हमेशा के लिए दफन हो जाएगा। लेकिन उत्तर प्रदेष हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता भाजपा नेता को फटकार लगाते हुए ताजमहल के इतिहास की रिसर्च करने और पीआईएल का दुरुपयोग नहीं करने की सलाह दी है। 

लेकिन हाईकोर्ट के याचिका खारिज करने के बाद भी यह विवाद खत्म हो जाएगा, ऐसा लगता नहीं है। अयोध्या छावनी तपस्वी अखाड़े के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंसाचार्य को कुछ दिनों पहले ताजमहल में एंट्री नहीं दी गई थी। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। वहीं, आगरा के एक हिंदूवादी नेता ने सुप्रीम कोर्ट में ताजमहल को लेकर याचिका डालने का ऐलान किया है।

दूसरी ओर, पीडीपी की चेयरमैन और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ताजमहल को लेकर बीजेपी को चुनौती दी है कि अगर इनमें दम है तो ताजमहल और लाल किला को मंदिर बना कर दिखाएँ फिर देखते हैं कितने लोग भारत में इन्हें देखने आएँगे। महबूबा ने कहा कि मुगलों के वक्त जो चीज़ें बनी हुई हैं जैसे - ताजमहल, मस्जिदें, किले ये उन्हें बिगाड़ना चाहते हैं, उनके पीछे पड़े हुए हैं। इससे कुछ हासिल नहीं होगा।

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जय हिंद।